इंदिरा एकादशी (Indira Ekadashi) आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। यह एकादशी पितृ पक्ष के मध्य में आती है, जिस कारण इसे 'पितरों को तारने वाली एकादशी' भी कहा जाता है। यदि आपके किसी पूर्वज को जाने-अनजाने हुए पापों के कारण मोक्ष प्राप्त नहीं हुआ है, तो इस दिन व्रत रखकर उसका पुण्य उन्हें दान करने से उनकी सद्गति सुनिश्चित होती है। शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत का फल गया में श्राद्ध करने के समान माना गया है।
इंदिरा एकादशी 2026: सटीक तिथि और पारण मुहूर्त
पंचांग गणना के अनुसार, साल 2026 में इंदिरा एकादशी की सही तिथि और पारण का समय इस प्रकार है:
- एकादशी व्रत तिथि: 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 6 अक्टूबर 2026, रात 02:07 बजे से
- एकादशी तिथि समाप्त: 7 अक्टूबर 2026, रात 12:34 बजे तक
- पारण (Vrat Parana) समय: 7 अक्टूबर 2026, सुबह 06:18 बजे से 08:35 बजे तक
- द्वादशी तिथि समाप्त: 7 अक्टूबर 2026, रात 09:59 बजे
इंदिरा एकादशी व्रत कथा: राजा इंद्रसेन और पिता का मोक्ष
पौराणिक कथा के अनुसार, सतयुग में महिष्मति नगरी में इंद्रसेन नाम के राजा राज्य करते थे। एक दिन देवर्षि नारद उनके दरबार में आए और बताया कि वे यमलोक से आ रहे हैं, जहाँ उन्होंने राजा के पिता को देखा। उनके पिता ने संदेश भेजा था कि पिछले जन्म में एकादशी का व्रत भंग होने के कारण उन्हें अभी तक मोक्ष नहीं मिला है और वे यमराज के यहाँ कष्ट भोग रहे हैं।
राजा इंद्रसेन व्याकुल हो उठे और नारद जी से उपाय पूछा। नारद जी ने उन्हें आश्विन कृष्ण एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करने और उसका पुण्य पिता को अर्पित करने को कहा। राजा ने ऐसा ही किया—उन्होंने उपवास रखा, ब्राह्मणों को भोजन कराया और व्रत का पुण्य अपने पिता के नाम किया। इस व्रत के प्रभाव से आकाश से फूलों की वर्षा हुई और राजा के पिता गरुड़ पर सवार होकर वैकुंठ चले गए। राजा को भी अंत में सुखद जीवन और मोक्ष प्राप्त हुआ।
पितृ पक्ष में इस व्रत का विशेष महत्व
चूंकि यह एकादशी श्राद्ध पक्ष में आती है, इसलिए इसके कुछ विशेष नियम हैं:
- पूर्वजों के लिए संकल्प: इस दिन व्रत का संकल्प लेते समय मन में अपने मृत पितरों का स्मरण करें और कहें कि आप यह पुण्य उन्हें अर्पित कर रहे हैं।
- श्राद्ध और तर्पण: इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ पितरों का तर्पण (Arghya) करना और उनके नाम से धूप-ध्यान करना अत्यंत फलदायी होता है।
- ब्राह्मण भोज: द्वादशी के दिन व्रत खोलने से पहले किसी सुयोग्य ब्राह्मण को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें।
पूजा विधि और मंत्र
- सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु के 'शालिग्राम' स्वरूप की पूजा करें।
- भगवान को तुलसी दल, फल और तिल अर्पित करें (पितृ पक्ष में तिल का महत्व अधिक होता है)।
- मंत्र: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' और 'ॐ पितृभ्यः नमः' का जाप करें।
- सावधानी: इस दिन तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन) और चावल का पूर्ण त्याग करें।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 में इंदिरा एकादशी कब है?
2026 में इंदिरा एकादशी 6 अक्टूबर, मंगलवार को मनाई जाएगी।
क्या इंदिरा एकादशी का पुण्य पितरों को दिया जा सकता है?
हाँ, इस एकादशी का मुख्य उद्देश्य ही पितरों को यमलोक की यातनाओं से मुक्त कराकर मोक्ष दिलाना है।
पितृ पक्ष में इंदिरा एकादशी क्यों महत्वपूर्ण है?
माना जाता है कि इस दिन किया गया व्रत गया तीर्थ में किए गए पिंड दान के बराबर फल देता है।
निष्कर्ष
इंदिरा एकादशी श्रद्धा और कृतज्ञता का पर्व है। यह व्रत हमें अपने पूर्वजों के प्रति हमारे उत्तरदायित्वों की याद दिलाता है। जो भक्त सच्ची निष्ठा से यह व्रत करते हैं, उन्हें न केवल श्रीहरि का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि उनके पूर्वजों की आत्मा भी तृप्त होकर उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती है।
