पद्मिनी एकादशी (Padmini Ekadashi) को 'पुरुषोत्तमी एकादशी' के नाम से भी जाना जाता है। यह एकादशी हर साल नहीं आती, बल्कि केवल 'अधिक मास' (जिसे मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं) के दौरान ही पड़ती है। वर्ष 2026 में ज्येष्ठ मास का अधिक मास होने के कारण यह दुर्लभ संयोग बन रहा है। मान्यता है कि जो पुण्य फल साल की सभी 24 एकादशियों के व्रत से मिलता है, वह अकेले पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से प्राप्त हो जाता है।
पद्मिनी एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग गणना के अनुसार, इस साल उन्मीलिनी महाद्वादशी का संयोग बन रहा है, जिससे इस व्रत का महत्व कई गुना बढ़ गया है। सटीक समय इस प्रकार है:
- एकादशी व्रत तिथि: 27 मई 2026, बुधवार
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 26 मई 2026, सुबह 05:10 बजे से
- एकादशी तिथि समाप्त: 27 मई 2026, सुबह 06:21 बजे तक
- पारण (Vrat Parana) समय: 28 मई 2026, सुबह 05:29 बजे से 08:13 बजे तक
- द्वादशी तिथि समाप्ति: 28 मई 2026, सुबह 07:44 बजे
पद्मिनी एकादशी व्रत कथा: कार्तवीर्य अर्जुन का जन्म
पौराणिक कथा के अनुसार, त्रेतायुग में राजा कृतवीर्य की कई रानियाँ थीं, लेकिन उन्हें कोई संतान सुख प्राप्त नहीं था। संतान प्राप्ति की इच्छा से राजा अपनी प्रिय रानी पद्मिनी के साथ गंधमादन पर्वत पर तपस्या करने चले गए। कई वर्षों की तपस्या के बाद भी जब फल नहीं मिला, तब रानी पद्मिनी ने देवी अनुसूया से उपाय पूछा।
सती अनुसूया ने रानी को अधिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। रानी पद्मिनी ने श्रद्धापूर्वक निर्जला व्रत किया। उनके व्रत से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए और वरदान मांगने को कहा। रानी ने राजा के लिए एक ऐसे पुत्र की कामना की जो सर्वगुण संपन्न हो और जिसे देवताओं के अतिरिक्त कोई न जीत सके। इसी व्रत के प्रभाव से महाप्रतापी कार्तवीर्य अर्जुन का जन्म हुआ, जिसने आगे चलकर रावण को भी बंदी बना लिया था।
अधिक मास एकादशी के विशेष नियम
चूंकि यह पुरुषोत्तम मास की एकादशी है, इसलिए इसके नियम सामान्य एकादशी से थोड़े भिन्न और कठिन होते हैं:
- कांसे के पात्र का निषेध: इस दिन कांसे के बर्तन में भोजन करना या पानी पीना वर्जित है।
- ब्रह्मचर्य पालन: दशमी तिथि से ही पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है।
- जागरण का महत्व: पद्मिनी एकादशी की रात को सोना नहीं चाहिए; रात भर विष्णु पुराण का पाठ या भजन-कीर्तन करना चाहिए।
- सात्विकता: शहद, मसूर की दाल, चने का साग और नमक (यदि संभव हो) का त्याग करें।
पूजा विधि और मंत्र
इस दिन भगवान विष्णु के 'पुरुषोत्तम' रूप की पूजा की जाती है। सुबह स्नानादि के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें और फिर भगवान विष्णु के सामने अखंड दीप जलाएं।
- मंत्र: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' के साथ-साथ 'श्री पुरुषोत्तमाय नमः' का जाप करें।
- अर्पण: भगवान को पीले वस्त्र, पीला चंदन और विशेष रूप से मालपुआ का भोग लगाएं।
- दान: ब्राह्मणों को अन्न, फल और मिट्टी के घड़े का दान करना महापुण्यदायी माना जाता है।
FAQ: पद्मिनी एकादशी से जुड़े सवाल
2026 में पद्मिनी एकादशी कब है?
2026 में पद्मिनी एकादशी 27 मई, बुधवार को है।
अधिक मास की एकादशी का क्या नाम है?
अधिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को 'पद्मिनी' और कृष्ण पक्ष की एकादशी को 'परम' एकादशी कहा जाता है।
क्या इस व्रत से संतान की प्राप्ति होती है?
हाँ, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रानी पद्मिनी को इसी व्रत के प्रभाव से कार्तवीर्य अर्जुन जैसा प्रतापी पुत्र प्राप्त हुआ था।
निष्कर्ष
पद्मिनी एकादशी का व्रत हर तीन साल में एक बार आता है, इसलिए भक्तों के लिए यह अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाने का स्वर्णिम अवसर है। विधि-विधान से किया गया यह व्रत न केवल भौतिक सुख प्रदान करता है, बल्कि जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति भी दिलाता है।
