वरुथिनी एकादशी (Varuthini Ekadashi) वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कहा जाता है। 'वरुथिनी' शब्द संस्कृत के 'वरुथिन' से बना है, जिसका अर्थ है—'प्रतिरक्षक' या 'कवच'। मान्यता है कि यह व्रत व्यक्ति को हर प्रकार के संकटों से बचाता है और उसे सुख-सौभाग्य का सुरक्षा कवच प्रदान करता है। इसे 'सौभाग्य प्रदान करने वाली' एकादशी भी कहा जाता है।
वरुथिनी एकादशी 2026: तिथि और पारण मुहूर्त
साल 2026 में उदयातिथि के अनुसार वरुथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल, सोमवार को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 अप्रैल 2026, सुबह 07:11 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 13 अप्रैल 2026, सुबह 07:14 बजे
- व्रत पारण (Parana) समय: 14 अप्रैल 2026, सुबह 05:59 बजे से 08:35 बजे तक
- द्वादशी तिथि समाप्ति: 14 अप्रैल 2026, सुबह 07:44 बजे
वरुथिनी एकादशी व्रत कथा: राजा मांधाता का उद्धार
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में नर्मदा नदी के तट पर मांधाता नामक एक तपस्वी राजा राज्य करते थे। एक बार जब राजा जंगल में तपस्या कर रहे थे, तभी एक जंगली भालू ने उन पर हमला कर दिया और उनका पैर चबाने लगा। राजा घबराए नहीं और अपनी तपस्या जारी रखी।
अंततः भगवान विष्णु ने प्रकट होकर अपनी गदा से भालू को मार डाला। भगवान ने राजा से कहा कि पिछले जन्म के अपराध के कारण तुम्हें यह कष्ट मिला है। उन्होंने राजा को मथुरा जाकर वैशाख कृष्ण एकादशी (वरुथिनी) का व्रत करने और उनके 'वाराह अवतार' की पूजा करने को कहा। राजा ने विधिपूर्वक व्रत किया और इसके प्रभाव से उनका पैर पुनः ठीक हो गया और उन्हें दिव्य शरीर प्राप्त हुआ।
इस दिन क्या न करें? (Prohibited Activities)
वरुथिनी एकादशी के व्रत में कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है, अन्यथा व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता:
- खाद्य निषेध: इस दिन कांसे के बर्तन में भोजन करना, मांस, मसूर की दाल, चने का साग, कोदो (एक प्रकार का अनाज) और शहद का सेवन वर्जित है।
- व्यवहार: जुआ खेलना, निंदा करना (बुराई), क्रोध और झूठ बोलने से बचें।
- दातून: एकादशी के दिन दातून (पेड़ की टहनी) करना भी वर्जित माना जाता है।
पूजा विधि और महत्व
वरुथिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के 'मधुसूदन' और 'वाराह' स्वरूप की पूजा की जाती है।
- सुबह उठकर गंगाजल मिले जल से स्नान करें।
- भगवान के सामने दीप जलाकर व्रत का संकल्प लें।
- खरबूजे का भोग और तुलसी दल अर्पित करना अत्यंत शुभ होता है।
- इस व्रत का पुण्य कन्यादान के पुण्य और हजारों वर्षों की तपस्या के बराबर माना जाता है।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वरुथिनी एकादशी 2026 में कब है?
वरुथिनी एकादशी 13 अप्रैल 2026, सोमवार को है।
क्या वरुथिनी एकादशी का व्रत शारीरिक कष्ट दूर करता है?
हाँ, पौराणिक कथा के अनुसार राजा मांधाता को इस व्रत के प्रभाव से शारीरिक कष्ट (पैर की चोट) से मुक्ति मिली थी।
पारण का सबसे शुभ समय क्या है?
14 अप्रैल की सुबह 05:59 से 08:35 के बीच व्रत खोलना सर्वश्रेष्ठ है।
निष्कर्ष
वरुथिनी एकादशी केवल एक उपवास नहीं, बल्कि आत्म-अनुशासन और आत्म-शुद्धि का मार्ग है। जो भक्त पूर्ण श्रद्धा से इस दिन मधुसूदन भगवान की आराधना करते हैं, उन्हें लोक और परलोक दोनों में अक्षय सुख की प्राप्ति होती है।
